छाप

दो बालगोठिया सुल्तान सिंग भाटी और सुल्तान खान भाटी दोनों रो भायलो चारो गडोगड सूरज बिसिजते ही भेला हुयजावे गाँव रे किनारे खेजड़े लीचे बेठ एक ही बोतल खोल परार दारू पिये, पण बीड़ी रा गंठा न्यारा न्यारा राखे सुल्तान सिंग बुड्ढाछाप रामकिषन रामनाथ कामड़ी वाले री कम्पनी और सुल्तान खान चाँद तलवार छाप वाली मोहम्मद खां हसन खां री कम्पनी री बीड़ी सिलगावे। अफवा इसी फेलियोड़ी की बुड्ढाछाप बीड़ी में सुअर रो केस तथा चाँद तलवार में गाय रो केस है । दारू री बोतल एक पण बीड़ी रे मामले में दोनु ही कट्टर । सुल्तान सिंह रिटायर फौजी सुल्तान खां खेतिहर किसान हा। सुल्तान सिंह फौज री नोकरी रा तजरबा सुनावता कि किस तरह सू बे अफसर सु छुट्टी मांग परार ओळ पाचोळ जागा जावंता जठे फौजी ने जावण री सख्त मनाही ही । ठीक रात रा पाछा आवंता बगत सिनेमा सु निकलते आदमी सूं टिकट री आधी पर्ची ले परार अफसर ते दिखा देवतां कि सिनेमा गया हा।
एक दिन फेर इस तरह सूं गया पण पाछा आया जिते सिनेमा खत्म हुय गयो और एक ही आदमी मिल्यो कोणी खने ही हाल में घणीसारी भीड़ देख परार बेमे बड़गया पके जलसो हो सुण परार मगन हुयग्या। जलसो पूरो हूव्णे पर बार निकल्ग्या। कसीदे री टोपी लगायोड़ा एक सेठ दिख्या सुल्तान सिंह फट बतलालिया और बोल्या सेठां आप बीकानेर रा हो काईं। सेठ बोल्या हाँ मारो नाम गंगादास झंवर है । सेठ बोल्या फौजी भाई गाणों किसोक लाग्यो। सुल्तान सिंह बोल्या समझ में तो म्हाने नहीं आयो पण आछो इसो लाग्यो कि कालजे में ठंडी ठारगी । सेठ बोल्या फौजी आधी रात रा थे अठे कियां । सुल्तान सिंग सारी बात बताई और बोल्या अफसर ने कई केसां । सेठ बोल्या कह दिया कि पाकिस्तान रे गायक नजाकत सलामत रो गाणों सुण आया हाँ थाने कई केवे कोनी । सुल्तान सिंह सुल्तान खान ने सारी बात बिगत बार बताई और केयो कि अफसर मारी बहाने बाजी री बात सुण परार बड़ा खुष हुया और बोल्या कि मने ठा हुती तो हूँ ही आ जातो । गाणों भी क्या चीज है कि जात पात रे भेद भाव रो अंष इमें हे ही कोनी देष रे कांकण री आढ़ भी कोनी ओळ पाचोळ जागा जठे में लुक परार जावंता बठे भी कोई छोरी नमाज पढ़े और कोई पूजा करे। कल थारो भतीजो गोपाल सिंह कोलेज री छुट्टी हुवण सूं गाँव आयो एक किताब बांची जिकेमे बांचते बकत में सुण्यो मंदिर मस्जिद बेर कराते मेल कराती मधुषाला मने इत्ती आछी लागी कि मैं पूरी सुनि भईडा ठेके री षोभा इसे ढ़ग सूं करोड़ी कि काना री खिड़क्यां खुलगी । तो केवण रो मतलब ओ हो कि ओळ पाचोळ जागा जठे आपा लुकर जावा और ठेके माथे भेला हुवां । इ जागावा में किताई ओगण हुवे एक गुण है कि जाति धरम ने छोड़ परार हर आदमी आदमी ही दीखे हे।
भारत पाकिस्तान री लड़ाई में एक पाकिस्तानी फौजी ने गिरफ्तार करयो फोजी रोवन ठुक्ग्यो और बोल्यो भायों आपां क्यों लड़ा हाँ अपारें आपस में तो कोई लड़ाई कोनी लड़ावन वाला स्वार्थी कोई ओर ही है। पाकिस्तानी फोजी ओलंपिक दोड़ाक हो और बोल्यो मने कए बार मलखान सिंह दोड़ाक सम मिलादो। सरकार री परमिसन लेर परार मलखान सिंह मिलण ने आया दोनु गणे कोड सूं बाथों बाथ मिल्या दोनुं ही रोवन ठुक्ग्या दोनुं ओलंपिक में मिल्योड़ा भायला हा। दोनुं भायला बात्यां में मस्ता हां आधी बोतल पी चुक्यां हा , बीड़ी रा बण्डल भी पड़िया हा। दो गोधा लड़ता लड़ता एक दम खने आग्या दोंनु भाग खड़ा हुया। गोधां री लड़ई में खडऋी बोतन आड़ी हुयगी दारू ढुल्ग्यो । बंडला री किरची किरची हुई गई छाप रा कागदिया उड़ग्या गोधा ठंडा हुय हुय गया परा । दोनु भायला सागी जागा आया कई बीड़ियां टूटगी कई साबत मिली। अब दोनुं सोचे किसी बीड़ी सिलगावां छाप तो कोनी । दोनु बोल्या भाईड़ा आ छाप ही फूट और झगड़े री जड़ हे । छाप उतारयां पाछे एक दूसरे ने इन्सान रे चेहरे सूं देखे ना कि मिनख रे चेहरे सू ।


लेखक 

भंवर लाल तंवर 
सेवानिवृत प्रधानाध्यापक 
बीकानेर 

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